पंतनगर। 18 फरवरी 2026। विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के कृषि संचार विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत 16 से 17 फरवरी 2026 को ‘मिलेट्स, सब्जी उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय महिलाओं का सशक्तिकरण’ विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ब्लॉक सितारगंज के ग्राम वमनपुरी की अनुसूचित जनजाति महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक संचार डा. जे. पी. जायसवाल थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मिलेट्स एवं सब्जी आधारित मूल्य संवर्धन गतिविधियां जनजातीय महिलाओं के लिए आयवर्धन एवं आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने विष्वविद्यालय द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम का संचालन जनजातीय उप योजना की प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कंडपाल के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य जनजातीय महिलाओं को तकनीकी ज्ञान, प्रसंस्करण कौशल, विपणन रणनीतियों तथा आवश्यक संसाधनों से सशक्त बनाना है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित कर सकें।
📌 पंतनगर विश्वविद्यालय ने मिलेट्स आधारित उद्यम प्रशिक्षण से महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
प्रशिक्षण के दौरान मिलेट्स आधारित उत्पाद निर्माण, उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक तथा मूल्य संवर्धन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही फायर टीम सिडकुल सितारगंज से आए फायर अधिकारी दुर्गा सिंह भंडारी एवं उमेश सिंह पानू ने फसलों को आग से सुरक्षित रखने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने सिलेंडर में नियंत्रित रूप से आग लगाकर उसे बुझाने का प्रदर्शन भी किया। समापन सत्र में प्रतिभागी महिलाओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें स्वरोजगार की दिशा में नई प्रेरणा एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है।
जनजातीय उप योजना के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सामग्री एवं आवश्यक इनपुट वितरित किए गए, जिससे वे अपने गांव स्तर पर मिलेट्स एवं सब्जी आधारित मूल्य संवर्धित उद्यम प्रारंभ कर सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि करने के साथ-साथ उन्हें सतत आजीविका एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

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